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Speech on Kargil Vijay Diwas in Hindi | कारगिल विजय दिवस पर भाषण | कारगिल विजय दिवस पर निबंध

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आओ सलामी दे उन्हें
जो इसके असली हक़दार है
मिट्टी की हर एक परत उन्ही की कर्ज़दार है।

माननीय प्रधानाचार्य जी, माननीय महोदय जी और उपस्तिथ सभी अथितिगण।

जैसा कि हम सब जानते है, आज का दिन भारत के इतिहास में स्वर्णाक्षरों से लिखा गया है क्योंकि यह सिर्फ दिवस ही नही बल्कि बर्फीले पहाड़ियों पे, 48 डिग्री celcius पे जहां आम आदमी के लिए सांस लेना भी दुष्कर है, वहाँ युद्ध लड़ा जिसमे कुल 2 लाख सैनिको ने भाग लिया था और 527 जवान शहीद हो गए।

पाकिस्तान सेना अमानवीय तरीको से सियाचिन ग्लेशियर पर कब्ज़ा कर लदाख और कश्मीर के बीच का संबंध तोड़ना चाहती थी और धीरे धीरे लोगो को भेज, ट्रेनिंग देकर किसी तरह भी अपना आधिपत्य स्थापित करना चाहती थी। जब वहां के चरवाहों ने यह संदिग्ध गतिविधि देखी तो उन्होंने तुरंत भारतीय सेना को सतर्क किया और तब भारतीय सेना ने अपनी कमान संभाली और 3 मई 1999 को यह युद्ध शुरू हुआ और 26 जुलाई 1999 को भारतीय सेना ने अपने जज़्बे और शौर्य का पराक्रम दिखाते हुए पाकिस्तान सेना को खदेड़ा और जीत का डंका बजाया। और यह दिन इतिहास में विजय कारगिल दिवस के नाम से प्रख्यात हुआ।

इसी दिन भारत के प्रधानमंत्री और भारतीय सैना के द्वारा दिल्ली गेट पे अमर जवान पर शहीदों को नमन किया जाता है और उन्हें श्रद्धांजलि भी दी जाती है।

इसी दिन विद्यालय, संस्थानों में विविध प्रकार के कार्यक्रम जैसे वाद विवाद, निबंध प्रतियोगिता, आदि आयोजित होती है और शहीदों को याद किया जाता है।

यह दिन देश के उन वीरो की याद दिलाता है जो हँसते हँसते देश के लिए शहीद हो गए, पर तिरंगे की आन, बान, शान को बनाये रखा, उन वीर माताओ की याद दिलाता है, जिन्होंने युद्ध मे भेजने से पहले अपने लाल का विजय तिलक किया था और और उन्होंने धरती माँ के गोद मे विजय ध्वज़ फहरा के सो गए। यह देश उन्ही की वीर गाथाओं से हो रहा गौरवविन्त है।

आज इस विजय कारगिल दिवस की सबको शुभकामनाएं देती हूं और कुछ पंक्तिया शहीदों को समर्पित करती हूं।

कारगिल विजय दिवस पर कविता | Kargil Vijay Diwas Poem

इतिहास तो उन वीरो का है
जो जलती चिता में कूद जाते है
मौत को हथेली में रखकर
दुश्मन को भी परास्त कर देते है।

ये वो बाज़ीगर है
जो अपना लोहा मनवा कर ही मानते है
दुश्मन कितना भी ताक़तवर हो
धूल चटा कर ही कफ़न ओढ़ते है।

तभी तो धरती भी इन्हें अपने आगोश में भर लेती है
आसमा तो बरसातों से पतझड में फूल खिलाता है
मिट जाती मिट्टी पर न मिट पाती यह रक्त भरी कुर्बानी
तभी तो पूरा देश इन्ही की गौरव गाथा गाता है।

नमन उन शहीदों को करते है
देश के उन वीरो को करते है
कफ़न ओढ़ के जो युद्ध मैदानो में उतरे थे
इस विजय कारगिल दिवस पे सलामी उन्हें करते है।

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