हमसे से कोई विरले ही होते है जो आने वाली समस्या को भाप कर उनके रोकथाम के प्रयास में लग जाते हैं और इसे ही विरले व्यक्तित्व के धनी सोनम वांचुंग जी से आज आप सबका परिचय करवाना चाहूगी।
नाम तो सुना होंगा
3 इडियट्स मूवी का एक किरदार
जो सिर्फ किरदार नही
रीयल लाइफ का हीरो है ।
सोनम वांचुग sir असाधारण व्यक्तित्व के धनी, एक कुशल शिक्षक जिसने शिक्षा के क्षेत्र में न सिर्फ बदलाव किया बल्कि शिक्षा प्रणाली को बदल कर रख दिया, S E C M O L इंस्टीट्यूट के संस्थापक जिन्होंने विद्यालय की ऐसी तस्वीर पेश कर डाली जो वाकई दांतो तले अंगुली चबाने जैसा है, S E C M O L इंस्टीट्यूट जो पूरा सौर ऊर्जा से संचारित है जहा विद्यार्थी हर रोज नई टेकनीक सीखते है और इसे अपने दैनिक जीवन में काम में लेकर और परिपक्व बनते है, शिक्षा जहा रोजगार के बहुत सारे अवसर भी प्रदान करती है ।
एक वो वक्त था जब लद्दाख के अधिकांश बच्चे स्कूल की तरफ जाना ही भी चाहते और वहा की लिटरेसी रेट बहुत कम थी, पर आज की बात करे sir का दृढ़ प्रयास और संकल्प के आगे पर्वत को भी झुकना पड़ा तो शिक्षा प्रणाली जो एक चुनौती पूर्ण कार्य था, उनके लिए कहा मुश्किल था। आज लद्दाख की लिटरेसी रेट है जो सोनम sir की ही बदौलत है।
यह तो बस एक शुरुआत थी, शिक्षित समाज की नीव रखने की, अभी तो चलना बहुत बाकी है, सोनम sir यह वो दीपक है, जो अंधकार को मिटाने आए है, अपने ज्ञान से अंधकार तिमिर को हटाने आए है जो जो विपदाएं आई रास्ते में, उनसे लड़कर जड़ से उखाड़ने आए है।
इनका 1994 में चलाया गया ऑपरेशन hope जो शिक्षा की प्रणाली में नया सुधार लेकर आया।
चित्रण क्या करू उनका जिसका जीवन खुद एक विश्लेषण है,
लाखों करोड़ों की भीड़ में बने वो पथ पदर्शक है
पूरे लद्दाख की तस्वीर बदलकर तकनीकी क्षेत्र में एक नई पहल करी
वो और कोई भी लद्दाख के real life hero सोनम sir है।
सोनम वांचुंग sir ने लद्दाख में -20 से -30c temperature में प्राकृतिक वातावरण के बीच रहकर उसको न सिर्फ संजोया है, पर्यावरण को मध्य नजर रखते हुए लद्दाख के लोगो की समस्या का भी निवारण किया।
हमारे भारतीय सैनिक 20 से -30c temperature में जब तैनात रहते है, बर्फीली पहाड़ी में मीनार बन खड़े रहते है, हड्डियों को गला देने सर्दी में एक समान खड़े रहते है, उनके लिए सोनम sir ने सोलर हीटेड टेंट का अविष्कार किया जो वाकई किसी वरदान से कम नही है।
उन्होंने लद्दाख में गर्मी में पानी की कमी को देखते हुए, आर्टिफिशियल ग्लेशियर्स का निर्माण किया जिन्हे बर्फ स्तूप कहा जाता है, जो सर्दी में पानी का संग्रहण कर, गर्मी में इससे छोड़ देती है, जिससे किसानों की फसल हरी भरी रहती है उनको रोलेक्स पुरुस्कार फॉर एंटरप्राइज से भी सम्मानित किया गया।
लद्दाख की परिपाठी को बदलने का श्रेय सोनम sir को ही जाता है,इन्हे लद्दाख का मसीहा भी कह दू तो भी कम है
अंत में चार पंक्तिया भारत के गौरव, लद्दाख के real life hero को समर्पित करती हु।
परेशानी तो सभी झेलते आते है
पर परेशानी पर विराम चिन्ह लगा पाता कोई कोई है
एक रास्ते पे तो सब चले आते है
पर रास्ते को बदल पाता कोई कोई है
और रील लाइफ से दूर real life के हीरो बन पाता कोई कोई है
और इस ही रियल लाइफ के हीरो है सोनम sir,
लद्दाख का सिर्फ नही पूरे भारत का गौरव है
उन्होंने जो किया वो किसी चमत्कार से कम नही है।
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