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वो 9 महीनों का सफ़र । poem on pregnancy time । Hindi poetry on journey of 9 months

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वो खुशनमा पल
लंबे से सफ़र के बाद आता है वो कल
समेत लेती हर दुख को अपने आंचल में
ताकि खिलता रहे बचपन

खुशी और दुख का भी होता है सामना
पर चेहरे पे रहती हरदम मुस्कान
क्योंकि कोख में उसके है
कुदरत का यह वरदान


एहसासों के आईने में वो एहसास निराला होता है
सबसे खूबसूरत यह 9 महीनों का सफ़र होता है
मुश्किलों का हर पल सामना भी होता है
क्योंकि माँ बनना कब इतना आसान होता है


अनुभव कितने हर पल एक अलग सा समा होता है
जीवन में खुशियों का फिर आगमन होता है
ममता का यह रूप सबसे प्यारा होता है
अपने बच्चे को अपने खून से सींचना एक माँ के लिए सबसे न्यारा होता है


माँ की ममता कब शब्दो मे बयां होती है
माँ शब्द में ही पूरी कायनात की खुशियां समायी होती है
तभी तो माँ और बच्चे का नाता दुनिया का सबसे खूबसूरत रिश्ता है
क्योंकि माँ जैसा फ़रिश्ता और कोई नही होता है।

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