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आसमान में इंद्रधनुष कैसे बनता है ?

Rainbow Poem,Poem on Rainbow in Hindi

बारिश के समय आसमान में एक सुंदर सी आकृति नज़र आती है जिसे हम इंद्रधनुष कहते है।पर क्या आप जानते है कि इंद्रधनुष बनता कैसे है, सूर्य के विपरीत दिशा में ही क्यों बनता है, सूर्य तो सफ़ेद रोशनी देता है, फिर यह सात रंग का कैसे होता है और यह इतना सुंदर प्रतीत कैसे होता है और यह कभी कभी ही क्यों दिखायी देता है।


बारिश के समय पे धरती पे छोटी छोटी बूंदे गिरती है पर कुछ बूंदे तो आसमान में ही रह जाती है और जब सूर्य की किरणें इन बूंदों पे पड़ती है तो वो सात रंगों में विभाजित हो जाती है। जिसे हम VIBGYOR भी कहते है।
जहाँ
V for violet
I for Indigo
B for blue
G for green
Y for yellow
O for orange
R for red
इसी को हम विक्षेपण(Dispersion) of light भी कहते है।


पर सूर्य के पास सात रंग आये कहा से। आप एक प्रिज्म लीजिये और white light को उससे पास कराए आप देखेंगे वो प्रिज्म से सात रंग निकलेंगे। यहां बारिश की बूंदे प्रिज्म का काम करती है, जैसे ही सूर्य की किरणें उन बूंदों पे पड़ेगी, वो सात रंगों में विभाजित हो जायेंगी।
हमे ऐसा ही लगता है सूर्य के पास सिर्फ सफेद रोशनी है पर ऐसा नही है उसकी रोशनी में सात रंग छिपे हुए है जो हमे दिखते नही है पर जब बारिश होती है और सूर्य की रोशनी उन बारिश की बूंदों पे गिरती है तो सात रंगों का एक खूबसूरत समा बन जाता है जिसे हम इंद्रधनुष कहते है। यह भी कहते है जो इंद्रधनुष का निर्माण होता है वो सूरज की विपरीत दिशा में ही होता है और सूरज की तरफ पीठ करके ही इसे हम देख सकते है।
करोड़ो बूंदे मिलकर एक इंद्रधनुष का निर्माण करती है। कभी आपने देखा है की नदियां, सागर, तालाब किनारे आपको आसानी से इन्द्रधनुष दिख सकता है क्यों? क्योंकि बारिश के समय यह करोड़ो बूंदे vapors बन के ऊपर उठती है और जब इनपे सूर्य की किरणें इन पे पड़ती है तो एक सुंदर इन्द्रधनुष दिखने को मिलता है।

इन्द्रधनुष पर कविता | HINDI POEM ON RAINBOW | Rainbow Poem

आओ रंगों से मुलाकात करते है
आसमा के इस अदभुत सौंदर्य की बात करते है
सात रंगों से जो बनता है
आज उसी की सुंदरता की बात करते है।


बच्चे दौड़े दौड़े आते है
देखकर उसे बड़े खुश हो जाते है
आसमान को देख मुस्कुराते है
अपनी मुस्कान से रंगों में और रंग भरते है।

जब बारिश आती है
तो साथ मे छोटी छोटी बूंदे लाती है
और कुछ बूंदे आसमान में रह जाती है
जो इंद्रधनुष बनाने में बड़ा काम आती है।

पता है सूरज के पास साथ रंग होते है
इन रंगों से आसमान में सौंदर्य बिखेरते है
जब सूर्य की रोशनी इन बूंदों पे पड़ती है
तो पूरी प्रकृति सुंदरता की चादर में लिप्त जाती है।

अदभुत यह नजारा होता है
पूरा आसमान इनका ही होता है
सूरज,चाँद, तारो पे बसेरा इनका होता है
सागर की लहरों पे भी देरा इनका होता है।

सबसे खूबसूरत यह पल होता है
जब रंगों का ऐसे मिश्रण होता है
सुंदरता की एक अलग ही पहचान होती है
जब इंद्रधनुष का निर्माण होता है।

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2 thoughts on “आसमान में इंद्रधनुष कैसे बनता है ?”

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