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आभार व्यक्त शायरी | आभार शायरी | अतिथीयोंके लिए शायरी

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1.

इस खूबसूरत शाम में शामिल होके
इसकी खूबसूरती को और बढ़ाने के लिए
और उसमें चार चांद लगाने के लिए
और अपना अमूल्य वक़्त हमे प्रदान करने के लिए
दिल से आपका आभार व्यक्त करते है।

2.

सुबह की किरणें प्रस्फुटित होता जैसे आकाश है
वैसे ही आपके आगमन से विद्यालय में फैला नया प्रकाश है
अल्फ़ाज़ तो नही है मेरे पास अब कहने को
पर आप जैसे अथिति जिस प्रांगण में पधारे हो
उस कार्यक्रम में लग जाते चार चांद है।

3.

न हर समुंदर में मोती सदा मिलते है
न हर मंज़र में दीप सदा जलते है
पर जिनके खिलने से समस्त उपवन खिल उठे
ऐसे पुष्प उपवन में सदियों बाद ही खिलते है।

4.

ऋणी रहेगा यह विद्यालय आपका
जो आप इस धरा पे पधारे
कल्पवृक्ष बन कर आये
और चंदन के भांति महका कर जा रहे हो।

5.

इस थिरकती शाम में शामिल होके
उसमे और नए रंग भरने के लिए
इन लम्हो को यादगार बनाने के लिए
और इस कार्यक्रम की शोभा में चार चांद लगाने के लिए
दिल से आपका शुक्रयादा करते है
और अपना बहमूल्य वक़्त देने के लिए दिल से आपका आभार व्यक्त करते है।

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