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बेटी की विदाई Kavita in Hindi

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Beti ki Vidai kavita, hindi poem on daugher marriage

दुनिया की परंपरा पर किंचित अतिशयोक्ति हम न करेंगे
बिटिया है अमानत किसी और की, गरिमा है वो एक परिवार की
रूढ़िगत परंपरा का सिलसिला है, बिटिया तो इस घर का गहना है
छोड़ चलना आज बाबुल का घर तुम्हे, इस परिवार का यही कहना है।

पापा की हो तुम लाड़ दुलारी, माँ की तुम सुपुत्री न्यारी
दादी की आंखों का तारा, दादा की हो तुम सबसे प्यारी बिटिया
हर ह्रदय में अंकित होता प्यार का सुनहरा दीपक हो तुम
हर आंख से बहते अश्रु के सुनहरे मोती हो तुम।

आज इस घर की चोहहदी पे झिलमिलाया एक सितारा है
बिटिया हमारी विदा हो रही सबका मन मुस्काया है
छोड़ कर बाबुल का आंगण, ले गया कोई सुनहरा साजन
सात फेरों की रीति में बंध छोड़ चली आज वो बाबुल का आंगण।

आपकी अमानत से आज आपको सुशोभित करते है हम
इस घर की बिटिया को आज आपको अर्पण करते है हम
गलती हो जाये इससे कभी तो माफ आप कर देना
बस यही दुआ और यही आशा आप सब से करते है हम।

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