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Poem on Mayra(मायरा)

Poem on Mayra(मायरा)

जब बेटी या बेटे की शादी होती है
तो बहुत सारी रस्मे होती है
पर उस रस्मो में से एक खास रस्म होती है
जो माँ के पीहर वाले निभाते है
इस रस्म की सबसे खास बात यह होती है
बेटी या बेटे की शादी के लिए जैसे हम बचपन से ही Savings करते है
ठीक उसी प्रकार दोयते या दोयती के जन्म लेते ही नाना नानी उसमे लग जाते है
मामा को अलग से एक PF Account भी बनाते है
और हर महीने उसमे कुछ पूंजी जमा करते है
और उसका लेखा जोखा रखते है
और खूबसूरत लम्हो के लिए संजो के रखते है।

क्योंकि यह रस्म बड़ी खास होती है
यू कहे ननिहाल की बुनियाद होती है
लाल चुनरी और चूड़ा मामा के घर की
दुआ में ढेर सारा प्यार होता है
तभी माँ के पीहर की एक अलग बात होती है
क्योंकि दोयती दोयता नाना नानी के महकते हुए गुलज़ार होते है।

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