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Poetry on Farewell | Short farewell poetry for teachers,students & Seniors

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क्या हमने कभी सोचा था
एक दिन ऐसा भी आएगा
अपने ही घरौंदे से हमे बाहर निकाल दिया जाएगा
कहने को तो यह Farewell होगा
पर यह आगाज़ होगा
उन कठिनाइयों का
जो हमारे रास्ते में
हमारे इंतजार में खड़ी होंगी
यह शोर, यह मस्ती, यह महफिलें और यह दोस्ती
अब किस्से कहानियों में दिखाई देगी
असली जंग तो अब शुरू होगी मित्रों
यहाँ से बाहर निकलते ही जो रास्ता दिखाई देगा
वही से सफ़र शुरू होगा
अलग अलग रास्तो से अलग अलग मंजिलों तक का
अलग अलग कठिनाइयों से निकलकर आसमान छूने तक का
हो सकता है कभी किसी राहों में मिले अजनबी बनकर
या कभी यादों की पोटली में मीठी याद बनकर
या एक ही रास्ते के पथिक बनकर
या एक ही मंज़िल पर
बस याद रखना तुम्हारी सफलता का श्रेय सिर्फ़ तुम्हारा नहीं है
बल्कि इस घरौंदे का
जहाँ से तुम्हारी नींव मजबूत हुई है
नरम मुलायम मिट्टी बनकर तो आये थे
यहां से त्वरित बीज बनकर फिर वृक्ष बनकर यहां से निकले हो
तो जिस दिन छू लो आसमानों को
एक बार इस घरौंदे में आकर उन दो हाथों को चूमना
यही तुम्हारी असली गुरु दक्षिणा होगी।

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